सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को MBBS/BDS में स्पोर्ट्स कोटा से जुड़ा एक मामला सुनवाई के लिए आया, जिसने पंजाब की मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि “खेल के नियम मैच शुरू होने के बाद नहीं बदले जा सकते” और इसी आधार पर 2024 सत्र की प्रवेश प्रक्रिया को आंशिक रूप से गलत ठहराया।
यह मामला Divjot Sekhon बनाम State of Punjab से जुड़ा था, जिसमें खेल उपलब्धियों के मूल्यांकन के नियमों को बीच प्रक्रिया में बदल दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे न केवल अनुचित बल्कि पारदर्शिता के खिलाफ बताया।
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विवाद की जड़ क्या थी?
2024 के MBBS/BDS दाखिले के लिए बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ ने प्रॉस्पेक्टस जारी किया था। इसमें स्पष्ट लिखा था कि स्पोर्ट्स कोटा में केवल कक्षा 11 और 12 की खेल उपलब्धियों को ही गिना जाएगा।
उम्मीदवारों ने इसी भरोसे आवेदन कर दिए।
लेकिन 16 अगस्त 2024 को अचानक एक ईमेल जारी हुआ, जिसमें कहा गया कि अब किसी भी कक्षा/वर्ष की खेल उपलब्धियां मान्य होंगी।
यहीं से विवाद शुरू हुआ।
नई व्यवस्था के चलते कुछ उम्मीदवार, जिनकी कक्षा 9 और 10 में उपलब्धियां थीं, अचानक मेरिट में ऊपर आ गए, जबकि पहले से आवेदन कर चुके खिलाड़ी पीछे खिसक गए।
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सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस संजय कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बदलाव को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा:
“जब प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो, तब मानदंडों में बदलाव करना कानूनन गलत है।”
अदालत ने यह भी नोट किया कि यह बदलाव एक निजी प्रतिनिधित्व के बाद हुआ, जिसमें यह तथ्य छिपाया गया कि उससे संबंधित व्यक्ति की बेटी को सीधा फायदा मिलने वाला था।
कोर्ट ने इसे नैतिकता और निष्पक्षता के खिलाफ बताया और कहा कि ऐसी प्रक्रिया से मनमानी और पक्षपात का रास्ता खुलता है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि
- 2023 में कोविड-19 के कारण कक्षा 9 और 10 की उपलब्धियों को केवल उस सत्र के लिए मान्य किया गया था।
- इसके बावजूद 2024 और 2025 में भी उसी अपवाद को जारी रखा गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
“जो नीति अस्थायी अपवाद के रूप में लाई गई थी, उसे बिना ठोस कारण स्थायी नहीं बनाया जा सकता।”
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कोर्ट का अंतिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरी मेरिट सूची दोबारा बनाना इस समय व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि इससे कई निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
इसलिए अदालत ने सीमित लेकिन ठोस राहत दी:
- Divjot Sekhon और Shubhkarman Singh को सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीटें दी जाएंगी।
- जिन उम्मीदवारों को उन सीटों का लाभ मिला था, उन्हें निजी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किया जाएगा।
- सभी छात्रों की अब तक की पढ़ाई और जमा की गई फीस सुरक्षित रहेगी।
साथ ही, कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में
प्रवेश नीति पूरी तरह स्पष्ट और तय करके ही प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
Case Title: Divjot Sekhon vs State of Punjab & Others
Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (Civil) No. 23112 of 2024
Case Type: Medical Admission – Sports Quota
Decision Date: 6 January 2026










