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दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को दिया कानूनी अभिभावक का अधिकार, कोमा में पति की संपत्ति व इलाज से जुड़े फैसले ले सकेंगी

प्रोफेसर अलका आचार्य बनाम दिल्ली सरकार और अन्य। दिल्ली हाईकोर्ट ने कोमा में पड़े व्यक्ति के लिए पत्नी को कानूनी अभिभावक नियुक्त किया, संपत्ति व इलाज से जुड़े फैसलों की अनुमति दी।

Vivek G.
दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को दिया कानूनी अभिभावक का अधिकार, कोमा में पति की संपत्ति व इलाज से जुड़े फैसले ले सकेंगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक भावनात्मक और संवेदनशील मामले में अहम फैसला सुनाते हुए प्रोफेसर अलका आचार्य को अपने पति सलाम खान का कानूनी अभिभावक (Legal Guardian) नियुक्त किया है। सलाम खान फरवरी 2025 से गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद कोमा जैसी स्थिति में हैं और किसी भी प्रकार का निर्णय लेने में असमर्थ हैं। यह फैसला न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रोफेसर अलका आचार्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उनके पति सलाम खान को 9 फरवरी 2025 को इंट्राक्रेनियल हेमरेज हुआ था। उन्हें पहले अपोलो अस्पताल और फिर फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई हफ्तों के इलाज के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और वे अब भी पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं।

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याचिका में कहा गया कि पति की इस स्थिति के कारण बैंक खातों, निवेश, बीमा, संपत्ति और इलाज से जुड़े फैसले लेना संभव नहीं हो पा रहा है। मौजूदा कानूनों में ऐसे मामलों के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं होने के कारण उन्होंने अदालत के parens patriae (राज्य का संरक्षक) अधिकार क्षेत्र का सहारा लिया।

कोर्ट की जांच और मेडिकल रिपोर्ट

अदालत के निर्देश पर सलाम खान की जांच जीबी पंत अस्पताल (GIPMER) के मेडिकल बोर्ड ने उनके घर पर की। मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि सलाम खान 100 प्रतिशत विकलांगता की स्थिति में हैं, न तो निर्णय ले सकते हैं और न ही अपने दैनिक कार्य स्वयं कर सकते हैं।

साथ ही, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के एसडीएम द्वारा की गई जांच में यह भी पुष्टि हुई कि प्रोफेसर अलका आचार्य उनकी वैध पत्नी हैं और उनके अलावा केवल दो बच्चे ही Class-I legal heirs हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि परिवार में किसी तरह का विवाद या हितों का टकराव नहीं है।

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बच्चों की सहमति और कोर्ट की टिप्पणी

अदालत के समक्ष सलाम खान के दोनों बच्चों ने शपथपत्र दाखिल कर साफ कहा कि उन्हें अपनी मां को अभिभावक बनाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। सुनवाई के दौरान वे वर्चुअली पेश भी हुए।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

“जब कोई व्यक्ति पूरी तरह निर्णय लेने में असमर्थ हो, तब उसके कल्याण के लिए अभिभावक की नियुक्ति आवश्यक हो जाती है।”

हाईकोर्ट का फैसला

सभी मेडिकल रिपोर्ट, एसडीएम की जांच और बच्चों की सहमति को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने प्रोफेसर अलका आचार्य को सलाम खान का कानूनी अभिभावक नियुक्त किया।

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अब वे उनके इलाज, देखभाल, दैनिक खर्च, बैंक खातों, निवेश, बीमा और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े सभी आवश्यक फैसले ले सकेंगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार केवल सलाम खान के हित और उनकी चिकित्सा जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इसी के साथ यह याचिका निस्तारित कर दी गई।

Case Title: Professor Alka Acharya vs Govt. of NCT of Delhi & Ors.

Case No.: W.P.(C) 16793/2025

Case Type: Writ Petition (Guardianship)

Decision Date: 31 December 2025

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