गुजरात हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना मुआवज़ा मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें ट्रेन के अंदर गिरने से हुई मौत को “अनटुवर्ड इंसीडेंट” मानने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति जे. सी. दोशी की एकल पीठ ने कहा कि रेलवे कानून का उद्देश्य यात्रियों के हितों की रक्षा करना है और इसके प्रावधानों की व्याख्या उदार दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।
अदालत ने ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामले के अनुसार, मृतक सदानंद ब्रह्मणे 31 जनवरी 2024 को अपने मित्र के साथ भुसावल–सूरत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 19008) से यात्रा कर रहे थे।
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यात्रा के दौरान अचानक ट्रेन में जोरदार झटका लगा, जिससे वह ऊपर वाली बर्थ से नीचे गिर गए। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल, अहमदाबाद में लगभग 8 लाख रुपये मुआवज़े की मांग करते हुए दावा दायर किया था।
रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने अगस्त 2025 में दावा खारिज कर दिया था।
ट्रिब्यूनल का कहना था कि चूंकि घटना ट्रेन के अंदर हुई और इसे रेलवे अधिनियम की धारा 123(c) के तहत “अनटुवर्ड इंसीडेंट” नहीं माना जा सकता, इसलिए रेलवे की मुआवज़ा देने की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
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इस फैसले के खिलाफ मृतक के परिजनों ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे अधिनियम, 1987 एक लाभकारी कानून है और इसकी व्याख्या संकीर्ण तरीके से नहीं की जानी चाहिए।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले भारत संघ बनाम प्रभाकरण विजया कुमार (2008) का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई यात्री रेलवे परिसर या ट्रेन में यात्रा के दौरान घायल होता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो रेलवे की जिम्मेदारी बन सकती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल ने कानून की व्याख्या करते समय अत्यधिक संकीर्ण दृष्टिकोण अपनाया।
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हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के 12 अगस्त 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मामला दोबारा विचार के लिए रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल को भेज दिया।
अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल रेलवे अधिनियम की धारा 123(c) और 124 को समग्र रूप से ध्यान में रखते हुए मामले का पुनः निर्णय करे।
साथ ही अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल को आठ सप्ताह के भीतर इस मामले का निपटारा करना होगा।
Case Details
Case Title: Brahmane Manisha Sadanandbhai & Ors. v. Union of India
Case Number: R/First Appeal No. 3793 of 2025
Decision Date: 13 March 2026
Counsels:
- Mr. Rathin P. Raval for the Appellants
- Mr. Monish Malviya for the Respondent










