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आयुर्वेदिक नर्सिंग ट्रेनिंग से नौकरी नहीं तय: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की अपील मंजूर कर HC आदेश पलटा

उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य। बनाम भावना मिश्रा एवं अन्य। आयुर्वेदिक नर्सिंग ट्रेनिंग से नौकरी का अधिकार नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की अपील मंजूर कर हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया।

Vivek G.
आयुर्वेदिक नर्सिंग ट्रेनिंग से नौकरी नहीं तय: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की अपील मंजूर कर HC आदेश पलटा

नई दिल्ली की अदालत संख्या में बुधवार को जब यह मामला सुना गया, तो बहस का केंद्र एक सीधा लेकिन संवेदनशील सवाल था-क्या किसी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश अपने-आप सरकारी नौकरी का अधिकार देता है?

Supreme Court of India ने इस सवाल का जवाब साफ शब्दों में दिया और उत्तर प्रदेश सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक नर्सिंग ट्रेनिंग कोर्स से जुड़ा है।
राज्य सरकार ने 1986 में एक सरकारी आदेश जारी कर इस कोर्स में चयन की प्रक्रिया तय की थी। उस समय यह प्रशिक्षण केवल सरकारी संस्थान में होता था और सीटें बेहद सीमित थीं-करीब 20।

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2013–14 के सत्र में विज्ञापन निकला, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद यदि सरकार किसी अभ्यर्थी को सेवा के लिए चुनेगी, तो उसे कम से कम पाँच साल सेवा देनी होगी। इसके लिए बांड की शर्त भी रखी गई थी।

लेकिन 2011 के बाद स्थिति बदल गई। निजी संस्थानों को भी इस ट्रेनिंग की अनुमति मिलने लगी और कुछ वर्षों में प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या कई गुना बढ़ गई।

विवाद कैसे शुरू हुआ

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग की। जब सरकार ने कहा कि अब सीधी नियुक्ति संभव नहीं है और चयन प्रक्रिया बदली जा चुकी है, तो अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

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हाईकोर्ट ने “वैध अपेक्षा (legitimate expectation)” के सिद्धांत के आधार पर सरकार को अभ्यर्थियों पर विचार करने का निर्देश दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची।

अदालत का अवलोकन

सुनवाई के दौरान पीठ ने रिकॉर्ड और विज्ञापनों की शर्तों को ध्यान से देखा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि-

“केवल किसी प्रशिक्षण कोर्स में प्रवेश लेने से नियुक्ति का कोई कानूनी अधिकार उत्पन्न नहीं होता।”

पीठ ने यह भी कहा कि बांड की शर्त केवल उन्हीं पर लागू होती है, जिन्हें वास्तव में सरकारी सेवा में चुना जाता है, न कि हर प्रशिक्षित अभ्यर्थी पर।

अदालत ने माना कि निजी संस्थानों को अनुमति मिलने के बाद परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी थीं। सीमित पदों पर हजारों प्रशिक्षित उम्मीदवारों को बिना चयन प्रक्रिया नियुक्त करना न तो संभव था और न ही न्यायसंगत।

अभ्यर्थियों की दलील थी कि वर्षों से यही प्रथा रही है कि ट्रेनिंग के बाद नौकरी मिलती थी।
लेकिन कोर्ट ने कहा कि-

“जब नीति और परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, तो केवल पुरानी प्रथा के आधार पर वैध अपेक्षा का दावा नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि 2014 के बाद, कुछ अपवादों को छोड़कर, किसी भी नए बैच को पुराने तरीके से नियुक्ति नहीं दी गई।

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फ़ैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली।
अदालत ने साफ कहा कि आयुर्वेदिक नर्सिंग ट्रेनिंग पूरा करना सरकारी नौकरी की गारंटी नहीं है, और नियुक्ति केवल निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए ही हो सकती है।

इसके साथ ही, हाईकोर्ट द्वारा दिया गया नियुक्ति पर विचार का निर्देश भी निरस्त कर दिया गया।

Case Title: State of Uttar Pradesh & Ors. vs Bhawana Mishra & Ors.

Case No.: Civil Appeal Nos. 14250–14252 of 2025

Decision Date: 08 January 2026

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