दिल्ली हाईकोर्ट ने OTT प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम हो रही फिल्म ‘लेडी चैटरलीज लवर’ को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश पारित किया। अदालत ने फिल्म के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया और याचिकाकर्ता को वैधानिक शिकायत निवारण तंत्र का सहारा लेने की सलाह दी।
न्यायमूर्ति पुरुषइंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने 17 फरवरी 2026 को यह आदेश दिया।
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मामला क्या था?
याचिकाकर्ता राज कुमार ने अदालत में दलील दी कि फिल्म में अत्यधिक स्पष्ट यौन दृश्य, नग्नता और ऐसे दृश्य हैं जो भारतीय सामाजिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फिल्म अपने घर पर देखी, जहां अनजाने में उनके परिवार के नाबालिग बच्चों के सामने भी यह सामग्री आ गई।
उनका कहना था कि इससे मानसिक पीड़ा हुई और उनके निजता के अधिकार, गरिमा और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन हुआ। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़ा।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने विभिन्न प्राधिकरणों के पास शिकायत की, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप था कि फिल्म की सामग्री अश्लील है और भारतीय कानून की सीमा से बाहर जाती है।
उन्होंने अदालत से मांग की कि फिल्म के भारत में प्रकाशन और स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई जाए।
कोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने देखा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और 2021 के आईटी नियमों के तहत जो तीन-स्तरीय स्व-नियमन व्यवस्था बनाई गई है, उसका पूरा उपयोग नहीं किया गया है।
प्रतिवादी पक्ष के वकील ने कहा कि हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट में इस तीन-स्तरीय तंत्र को लेकर कुछ कार्यवाही लंबित है, लेकिन OTT प्लेटफॉर्म अब भी इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि 22 नवंबर 2025 के पत्र के माध्यम से याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार किया गया था और पाया गया कि फिल्म आईटी नियम, 2021 या अन्य कानूनों का उल्लंघन नहीं करती।
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प्रतिवादी की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि यदि याचिकाकर्ता असंतुष्ट हैं तो वे डिजिटल पब्लिशर्स कंटेंट ग्रिवेंस काउंसिल के समक्ष जा सकते हैं, जो दूसरे स्तर का शिकायत निवारण मंच है।
अदालत को यह भी बताया गया कि यह परिषद पूरी तरह कार्यरत है और इसके अध्यक्ष एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश हैं।
इस पर अदालत ने कहा कि उक्त बयान को रिकॉर्ड पर लिया जाता है।
अदालत का फैसला
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध वैधानिक उपाय का उपयोग किए बिना सीधे रिट याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
पीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को संबंधित परिषद के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी जाती है। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उनकी शिकायत पर उचित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।
इसी अवलोकन के साथ अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
Case Title: Raj Kumar v. Union of India & Anr.
Case No.: W.P.(C) 2271/2026
Decision Date: 17 February 2026










