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प्रोबेशन के दौरान सेवा असंतोषजनक: हिमाचल हाईकोर्ट ने चपरासी की बर्खास्तगी को सही ठहराया

फकीर चंद बनाम हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अगर शर्तों में इजाज़त हो तो प्रोबेशन वाले कर्मचारी को बिना जांच के खराब सर्विस के लिए नौकरी से निकाला जा सकता है।

Vivek G.
प्रोबेशन के दौरान सेवा असंतोषजनक: हिमाचल हाईकोर्ट ने चपरासी की बर्खास्तगी को सही ठहराया

शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सेवा विवाद में यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी प्रोबेशन अवधि में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाता, तो नियोक्ता को उसकी सेवाएं समाप्त करने का अधिकार है। कोर्ट ने चपरासी के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए उसकी सेवा से मुक्त किए जाने के आदेश को वैध ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता फकीर चंद को वर्ष 2019 में हाईकोर्ट की एक न्यायाधीश की “पियोन ऑफ चॉइस” के रूप में सह-समाप्ति (co-terminus) आधार पर नियुक्त किया गया था। बाद में जनवरी 2023 में उन्हें नियमों में छूट देते हुए नियमित चपरासी के पद पर प्रोबेशन पर रखा गया।

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नियुक्ति आदेश में यह स्पष्ट था कि दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि के दौरान यदि कार्य और आचरण संतोषजनक नहीं पाए गए, तो बिना नोटिस सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।

सितंबर 2023 में, प्रोबेशन अवधि पूरी होने से पहले ही, हाईकोर्ट प्रशासन ने यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं कि उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा।

याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज होने और उसके बाद निलंबन की कार्रवाई होने के कारण सेवा समाप्ति आदेश वास्तव में दंडात्मक (punitive) है।

उनका कहना था कि बिना विभागीय जांच के इस तरह की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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अदालत की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि सेवा समाप्ति आदेश में कहीं भी आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं है।
पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“सेवा से मुक्त करने का आदेश केवल प्रोबेशन अवधि के दौरान असंतोषजनक कार्य के आधार पर है, इसमें कोई कलंक या दंडात्मक टिप्पणी नहीं की गई है।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि निलंबन की कार्रवाई केवल नियमों के तहत 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहने के कारण की गई थी, जो एक अलग प्रशासनिक प्रक्रिया है।

अदालत ने दोहराया कि प्रोबेशन पर नियुक्त कर्मचारी को पद पर स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं होता।

यदि नियुक्ति शर्तों में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान हो कि असंतोषजनक सेवा पर बिना नोटिस कार्यमुक्त किया जा सकता है, तो ऐसी कार्रवाई को दंडात्मक नहीं माना जाएगा।

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अदालत का फैसला

सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को निराधार पाया।

कोर्ट ने कहा कि नियोक्ता का संतोष भंग होने की स्थिति में प्रोबेशन अवधि के दौरान कर्मचारी को सेवा से मुक्त करना पूरी तरह वैध है।

अंततः, अदालत ने याचिका खारिज करते हुए सेवा समाप्ति आदेश को बरकरार रखा।

Case Title: Faqeer Chand vs High Court of Himachal Pradesh

Case No.: CWP No. 7191 of 2023

Case Type: Service Matter – Writ Petition

Decision Date: 18 December 2025

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