केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि ग्राम पंचायत से जुड़े मामलों की जांच करने वाला लोकपाल किसी ग्राम अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून में ग्राम अधिकारी को उस कैटेगरी के “पब्लिक सर्वेंट” में शामिल नहीं किया गया है जिन पर लोकपाल जांच कर सकता है।
इस आधार पर कोर्ट ने ग्राम अधिकारी के खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द कर दिया।
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मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता सहीर (Saheer), जो अलप्पुझा जिले के पाथियूर गांव में Village Officer के रूप में कार्यरत हैं, ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उनके खिलाफ स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के Ombudsman के समक्ष एक शिकायत दर्ज की गई थी। यह शिकायत दूसरे प्रतिवादी सेनन पिल्लई द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
Village Officer ने अदालत से कहा कि Kerala Panchayat Raj Act, 1994 के तहत Ombudsman केवल स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के कर्मचारियों, अधिकारियों या निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ शिकायतों की जांच कर सकता है।
उनका तर्क था कि Village Officer इस श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Ombudsman के समक्ष उनके खिलाफ कार्यवाही चलाना कानूनन सही नहीं है।
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अदालत के सामने मुख्य कानूनी सवाल
मामले में मुख्य सवाल यह था कि क्या Village Officer को Kerala Panchayat Raj Act की धारा 271F(g) के तहत “Public Servant” माना जा सकता है, जिसके खिलाफ Ombudsman कार्रवाई कर सकता है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि Village Officer राजस्व विभाग का कर्मचारी होता है और वह स्थानीय स्वशासन संस्था का कर्मचारी नहीं है। इसलिए Ombudsman को उसके खिलाफ शिकायत की जांच करने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति पी. वी. कुन्हीकृष्णन की एकल पीठ ने अधिनियम की संबंधित धाराओं की विस्तार से जांच की।
अदालत ने कहा कि धारा 271F(g) में “Public Servant” की परिभाषा स्पष्ट है। इसमें केवल स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के कर्मचारी, अधिकारी या निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि Village Officer इन श्रेणियों में नहीं आता।
पीठ ने कहा:
“Village Officer को Kerala Panchayat Raj Act की धारा 271F(g) में बताए गए किसी भी वर्ग में शामिल नहीं किया जा सकता। इसलिए उसके खिलाफ Ombudsman के समक्ष शिकायत कायम नहीं रह सकती।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि Ombudsman की शक्तियां धारा 271J के तहत केवल उन्हीं मामलों तक सीमित हैं जिनमें स्थानीय स्वशासन संस्था या उसके कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार या प्रशासनिक गड़बड़ी के आरोप हों।
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अदालत का फैसला
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता Village Officer होने के कारण Ombudsman के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि Ombudsman के समक्ष चल रही शिकायत में केवल Village Officer के खिलाफ की गई कार्यवाही को रद्द किया जाता है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में शामिल अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ Ombudsman कानून के अनुसार कार्यवाही जारी रख सकता है।
Case Title: Saheer v. Ombudsman for Local Self Government Institutions & Another
Case No.: WP(C) No. 15062 of 2025
Decision Date: 11 February 2026










