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प्रारंभिक परीक्षा में छूट लेने वाले आरक्षित अभ्यर्थी को जनरल कैडर का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

यूनियन ऑफ इंडिया बनाम जी. किरण और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जो किसी भी स्टेज पर छूट का फायदा उठाते हैं, वे इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में जनरल कैडर में एलोकेशन का दावा नहीं कर सकते।

Vivek G.
प्रारंभिक परीक्षा में छूट लेने वाले आरक्षित अभ्यर्थी को जनरल कैडर का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

भारतीय वन सेवा (IFS) कैडर आवंटन से जुड़े एक लंबे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ शब्दों में कानून की स्थिति स्पष्ट कर दी। अदालत ने कहा कि जिस आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में छूट (Relaxation) ली हो, वह बाद में सामान्य (जनरल) श्रेणी की सीट का दावा नहीं कर सकता, भले ही अंतिम मेरिट में उसकी रैंक अधिक क्यों न हो।

यह फैसला Union of India बनाम G. Kiran व अन्य मामले में सुनाया गया, जिसमें केंद्र सरकार और एक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार की अपील स्वीकार कर ली गई।

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मामले की पृष्ठभूमि

विवाद भारतीय वन सेवा परीक्षा 2013 से जुड़ा है।

  • G. Kiran, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आते हैं।
  • उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) में SC के लिए तय कट-ऑफ के आधार पर क्वालिफाई किया।
  • मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में उनके अंक अधिक रहे और अंतिम मेरिट सूची में वे सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार Antony S. Mariyappa से ऊपर रहे।

कर्नाटक कैडर में केवल एक जनरल इनसाइडर सीट उपलब्ध थी। केंद्र सरकार ने यह सीट सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को दी और G. Kiran को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया। इसी निर्णय को चुनौती दी गई।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) और बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने G. Kiran के पक्ष में फैसला दिया।
हाईकोर्ट का मानना था कि-

“प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग टेस्ट है, उसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं गिने जाते।”

इस आधार पर अदालत ने कहा कि मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवार को सामान्य कैडर से वंचित नहीं किया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस तर्क से असहमति जताई।
पीठ ने स्पष्ट किया कि-

“यदि कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी चरण में छूट लेता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में समायोजित नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा भले ही स्क्रीनिंग के लिए हो, लेकिन वह चयन प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है।

यदि उम्मीदवार सामान्य कट-ऑफ पर प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर पाया और आरक्षण की छूट के कारण आगे बढ़ा, तो यह छूट चयन प्रक्रिया के पूरे ढांचे को प्रभावित करती है।

नियमों की व्याख्या

कोर्ट ने IFS परीक्षा नियम, 2013 और कैडर आवंटन नीति (2008, संशोधित 2011) का विस्तृत विश्लेषण किया।
अदालत के अनुसार-

  • “General Standard” का अर्थ यह है कि उम्मीदवार ने किसी भी चरण में कोई छूट न ली हो
  • प्रारंभिक परीक्षा में छूट लेने वाला उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की सीट के लिए पात्र नहीं हो सकता।

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने नियम 14 और नीति के पैरा 9 की गलत व्याख्या की।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने CAT और कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश रद्द कर दिए।
अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा किया गया कैडर आवंटन सही ठहराया और कहा कि-

  • Antony S. Mariyappa को कर्नाटक का जनरल इनसाइडर कैडर मिलना वैध है।
  • G. Kiran, जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण की छूट ली थी, सामान्य कैडर का दावा नहीं कर सकते।

इसके साथ ही सभी अपीलें स्वीकार कर ली गईं और कोई लागत (Cost) नहीं लगाई गई।

Case Title: Union of India vs G. Kiran & Ors.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 4743 of 2020

Case Type: Service Law – Cadre Allocation

Decision Date: 6 January 2026

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