सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी टोल प्लाज़ा विवाद से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए गिरफ्तार टोल कर्मचारियों को जमानत दे दी है।
अदालत ने कहा कि आरोपियों को दो महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखना उनके अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई को दिल्ली के Tis Hazari Courts में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला 14 जनवरी 2026 को बाराबंकी जिले के गोतोना बरा टोल प्लाज़ा पर हुए विवाद से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता एक निजी कंपनी के कर्मचारी थे जो लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे पर टोल वसूली का काम कर रहे थे। आरोप है कि एक वकील ने टोल शुल्क देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
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इसके बाद FIR नंबर 15/2026 दर्ज की गई और कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि गिरफ्तारी के समय उन्हें गिरफ्तारी के आधार भी नहीं बताए गए।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद स्थानीय बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पास कर दिया कि कोई भी वकील आरोपियों का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा।
जब एक अधिवक्ता ने आरोपियों की ओर से जमानत याचिका दाखिल की, तो कथित रूप से कुछ वकीलों ने उनके कार्यालय में तोड़फोड़ की और फर्नीचर तक जला दिया।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस माहौल के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश में उचित कानूनी सहायता मिलना लगभग असंभव हो गया था।
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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहत की पीठ ने इस घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
अदालत ने कहा कि कानूनी पेशा एक समय सम्मानित और नैतिक पेशा माना जाता था, लेकिन इस मामले में हुई घटनाओं ने इसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।
पीठ ने कहा कि किसी भी आरोपी की पैरवी करने वाले वकील के खिलाफ हिंसा या दबाव बनाना कानून के शासन के खिलाफ है और ऐसे कृत्यों की कड़ी निंदा की जानी चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस मामले में उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह ऐसा मामला नहीं था जिसमें आरोपियों को जमानत से वंचित रखा जाना चाहिए था।
अदालत ने निर्देश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत मुचलके पर तुरंत जमानत दी जाए।
साथ ही निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले को दिल्ली की Tis Hazari Courts में स्थानांतरित कर दिया गया।
इसके अतिरिक्त अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक को निर्देश दिया कि जमानत के बाद आरोपियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
Case Title: Vishvjeet & Ors v State of Uttar Pradesh & Anr
Case Number: Writ Petition (Criminal) No. 109 of 2026
Judge: Justice Vikram Nath, Justice Sandeep Mehta
Decisioin Date: March 17, 2026










