केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में प्रसादम के रूप में वितरित किए जाने वाले अभिषेक घी प्रसादम (Aadiya Sishtam Neyy) की बिक्री और लेखा-जोखा में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए ₹25.52 लाख के वित्तीय अंतर को गंभीर मानते हुए विस्तृत ऑडिट कराने का निर्देश दिया।
डिवीजन बेंच ने कहा कि विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए ताकि अनियमितताओं की जांच कर उचित सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला केरल स्टेट ऑडिट विभाग के संयुक्त निदेशक द्वारा प्रस्तुत एक विशेष अंतरिम रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट सबरीमाला में 1201 M.E. मंडलम–मकरविलक्कु उत्सव के दौरान अभिषेक घी प्रसादम के संग्रह, तैयारी, वितरण और बिक्री की जांच के आधार पर तैयार की गई थी।
अदालत ने पहले ही 1996 में आदेश दिया था कि हर वर्ष इस उत्सव से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन - जैसे आपूर्ति अनुबंध, स्टॉक, बिक्री और खर्च - का ऑडिट किया जाए और यदि कोई अनियमितता मिले तो उसकी रिपोर्ट अदालत को दी जाए।
उसी आदेश के अनुपालन में यह रिपोर्ट अदालत के सामने रखी गई।
ऑडिट रिपोर्ट में प्रसादम के रूप में वितरित किए जाने वाले घी के प्रबंधन और लेखांकन में कई गंभीर कमियाँ सामने आईं।
सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि घी के संग्रह, फिल्टरिंग और वितरण के दौरान कहीं भी वास्तविक मात्रा मापने की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि वास्तव में कितना घी प्राप्त हुआ और कितना इस्तेमाल हुआ।
इसके अलावा, रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी बेहद ढीली पाई गई। वितरण से जुड़े कई विवरण चार साधारण स्कूल नोटबुक में हाथ से लिखे गए थे, जिनमें बार-बार कटिंग, सुधार और अपूर्ण प्रविष्टियाँ थीं।
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ऑडिट टीम ने यह भी पाया कि कुछ दिनों में प्लास्टिक रोल के प्रति किलो से बनने वाले घी पाउच की संख्या में भारी अंतर था -
कहीं 332 पाउच प्रति किलो, तो कहीं 636 पाउच प्रति किलो तक।
ऑडिट के अनुसार, प्रसादम बिक्री के रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच बड़ा अंतर मिला।
रिपोर्ट में बताया गया कि:
- मंदिर विशेष अधिकारी के रिकॉर्ड के अनुसार जमा राशि ₹3,17,37,200 थी।
- जबकि वितरित पाउच के आधार पर देय राशि ₹3,42,89,200 होनी चाहिए थी।
इस प्रकार कुल ₹25,52,000 की कमी पाई गई।
ऑडिट टीम ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए विस्तृत जांच की सिफारिश की।
डिवीजन बेंच ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि मंदिर प्रशासन का कर्तव्य है कि वह सही और पारदर्शी लेखा-जोखा बनाए रखे।
अदालत ने कहा, “देवस्वम प्राधिकरण का दायित्व है कि वे सही और सटीक खाते बनाए रखें। यदि ऐसा है तो ऑडिट विभाग के सवालों का जवाब देने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।”
बेंच ने यह भी नोट किया कि ऑडिट विभाग द्वारा भेजे गए कई प्रश्नों का संबंधित अधिकारियों ने जवाब तक नहीं दिया, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया।
सभी तथ्यों और ऑडिट रिपोर्ट को देखते हुए केरल हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि:
- ऑडिट विभाग विस्तृत ऑडिट करे।
- यह ऑडिट फरवरी 2025 से अक्टूबर 2025 तक के मासिक पूजा काल को भी कवर करेगा।
- विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
बेंच ने कहा कि इससे अदालत को अनियमितताओं की सही तस्वीर समझने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
मामले को आगे की सुनवाई के लिए 1 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
Case Title: The Joint Director, Kerala State Audit Department v. The Secretary, Travancore Devaswom Board
Case No.: DBAR No. 1 of 2026
Decision Date: 13 March 2026










