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निजी हित छिपाकर PIL दाखिल करने पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता को ₹25 लाख लागत का नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाईवे पर वेब्रिज को लेकर दायर PIL में याचिकाकर्ता के निजी हित होने पर गंभीर सवाल उठाए और ₹25 लाख लागत लगाने का कारण बताओ नोटिस जारी किया। - Himmat Singh Gehlot v. State of Rajasthan

Shivam Y.
निजी हित छिपाकर PIL दाखिल करने पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता को ₹25 लाख लागत का नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाईवे पर लगाए गए वेब्रिज (धर्म कांटा) को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया लगता है कि याचिका पूरी तरह सार्वजनिक हित में नहीं है और इसके पीछे निजी हित भी हो सकता है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए उस पर ₹25 लाख का जुर्माना लगाया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थापित एक वेब्रिज (धर्म कांटा) से जुड़ा है, जिसे लेकर सुरक्षा और वैधता के मुद्दे उठाए गए थे।

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याचिकाकर्ता हिम्मत सिंह गहलोत ने अदालत में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया कि राजस्थान में कई स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग और सर्विस रोड के पास अवैध रूप से रॉयल्टी नाके और वेब्रिज स्थापित किए गए हैं, जिससे सड़क सुरक्षा को खतरा है।

याचिका में इन प्रतिष्ठानों को हटाने, राज्य-स्तरीय ऑडिट कराने और सुरक्षा मानकों को लागू करने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान निजी कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित वेब्रिज को पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग से 75 मीटर से अधिक दूरी पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

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उन्होंने यह भी कहा कि यह वेब्रिज खनन विभाग के लिए रॉयल्टी संग्रह की प्रक्रिया का हिस्सा है और राज्य के राजस्व से जुड़ा है।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह मामला सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा है तथा अवैध प्रतिष्ठानों की राज्य-व्यापी जांच आवश्यक है।

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता के परिवार का खनन व्यवसाय से संबंध है और वेब्रिज संचालन से जुड़े होने के आरोप भी रिकॉर्ड पर आए हैं।

अदालत ने कहा कि यदि यह तथ्य सही हैं तो याचिकाकर्ता का इस मामले में प्रत्यक्ष व्यावसायिक हित हो सकता है।

कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका दायर करने वाला व्यक्ति पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ अदालत के समक्ष आए। यदि निजी हित छिपाए जाते हैं तो PIL की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है।

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राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता का इस मामले में निजी हित हो सकता है।

अदालत ने:

  • याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि क्यों न उस पर ₹25 लाख की लागत लगाई जाए।
  • याचिकाकर्ता का नाम मामले में याचिकाकर्ता से हटाकर प्रतिवादी के रूप में जोड़ा।
  • मामले को सुओ मोटू जनहित कार्यवाही के रूप में जारी रखने का निर्णय लिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा और हाईवे के पास खतरनाक प्रतिष्ठानों का मुद्दा सार्वजनिक महत्व का है, इसलिए कार्यवाही जारी रहेगी।

Case Title: Himmat Singh Gehlot v. State of Rajasthan

Case Number: D.B. Civil Writ Petition No. 24826/2025

Judge: Justice Arun Monga, Justice Sunil Beniwal

Decision Date: 13 March 2026

Counsels:

  • Respondents – Senior Advocate Dr. Sachin Acharya and others
  • Petitioner – Senior Advocate Rajesh Joshi assisted by Rishi Soni

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