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सुप्रीम कोर्ट ने भर्ति टेलीकॉम के शेयर कैपिटल घटाने के फैसले को बरकरार रखा, अल्पसंख्यक निवेशकों की चुनौती खारिज

पन्नालाल भंसाली बनाम भारती टेलीकॉम लिमिटेड और अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने भर्ति टेलीकॉम के शेयर कैपिटल रिडक्शन को वैध ठहराया और अल्पसंख्यक निवेशकों की अपील खारिज की। जानें पूरा फैसला और कोर्ट की टिप्पणी।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने भर्ति टेलीकॉम के शेयर कैपिटल घटाने के फैसले को बरकरार रखा, अल्पसंख्यक निवेशकों की चुनौती खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने भर्ति टेलीकॉम लिमिटेड (BTL) के शेयर कैपिटल घटाने और अल्पसंख्यक शेयरधारकों को भुगतान कर बाहर करने की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए निवेशकों की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि कंपनी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कंपनियों अधिनियम, 2013 के तहत वैधानिक है और इसमें किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता या पक्षपात साबित नहीं हुआ।

यह फैसला उस विवाद से जुड़ा था जिसमें कुछ निवेशकों ने आरोप लगाया था कि उन्हें बहुत कम कीमत पर कंपनी से बाहर किया गया।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला पन्नालाल भंसाली और अन्य निवेशकों द्वारा दायर अपीलों से जुड़ा था। इन निवेशकों का आरोप था कि भर्ति टेलीकॉम ने शेयर कैपिटल कम करने की प्रक्रिया के माध्यम से अल्पसंख्यक शेयरधारकों को कंपनी से बाहर कर दिया।

कंपनी ने कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 66 के तहत शेयर कैपिटल कम करने का प्रस्ताव पास किया। इस योजना के तहत लगभग 2.84 करोड़ इक्विटी शेयर रद्द कर दिए गए और बदले में निवेशकों को प्रति शेयर ₹163.25 का भुगतान प्रस्तावित किया गया।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने बाद में इस राशि को संशोधित करते हुए ₹196.80 प्रति शेयर करने का निर्देश दिया क्योंकि डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स घटाने को अनुचित माना गया था।

इसके बाद कुछ शेयरधारकों ने NCLAT और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

निवेशकों की मुख्य दलील

अपीलकर्ताओं का कहना था कि कंपनी ने उन्हें अनुचित तरीके से बाहर कर दिया और शेयरों की कीमत बहुत कम तय की गई।

उनका आरोप था कि:

  • शेयरों का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से नहीं किया गया।
  • मूल्यांकन करने वाली संस्था कंपनी के आंतरिक ऑडिटर से जुड़ी हुई थी, जिससे पक्षपात की आशंका थी।
  • शेयर मूल्य तय करते समय गलत पद्धति अपनाई गई और Discount for Lack of Marketability (DLOM) लागू कर कीमत और घटा दी गई।

निवेशकों ने यह भी कहा कि बैठक की सूचना में आवश्यक जानकारी पूरी तरह साझा नहीं की गई और यह एक “ट्रिकी नोटिस” था जिससे शेयरधारकों को सही निर्णय लेने में कठिनाई हुई।

उनका तर्क था कि कंपनी के अधिकांश शेयर भर्ति एयरटेल में निवेश के रूप में थे, इसलिए उसी आधार पर मूल्य तय होना चाहिए था।

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कंपनी की दलील

भर्ति टेलीकॉम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार हुई है।

कंपनी ने कहा कि:

  • शेयर कैपिटल घटाने का प्रस्ताव 99.90% बहुमत से पास हुआ था।
  • पहचाने गए अल्पसंख्यक शेयरधारकों में से भी 76.35% ने प्रस्ताव का समर्थन किया था
  • कंपनी के शेयर पहले ही स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट हो चुके थे और लंबे समय से कोई डिविडेंड नहीं दिया गया था।

कंपनी का कहना था कि शेयरों की बाज़ार में खरीद-फरोख्त संभव नहीं थी, इसलिए बाजार में तरलता की कमी को ध्यान में रखते हुए DLOM लागू किया गया।

अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शेयर कैपिटल कम करना कंपनी का आंतरिक निर्णय होता है, बशर्ते वह कानून और प्रक्रिया का पालन करे।

पीठ ने कहा:

“शेयर कैपिटल में कमी पूरी तरह से घरेलू मामला है जो मेजॉरिटी के फैसले पर निर्भर करता है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 66 के तहत शेयर कैपिटल कम करने के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट अनिवार्य नहीं है, हालांकि कंपनी ने फिर भी मूल्यांकन कराया था।

पीठ ने माना कि दस्तावेज़ कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस में निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए थे और प्रक्रिया में कोई गंभीर अनियमितता साबित नहीं हुई।

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DLOM पर अदालत का रुख

अदालत ने कहा कि Discount for Lack of Marketability (DLOM) का उपयोग पूरी तरह अवैध नहीं है।

पीठ के अनुसार, यदि किसी कंपनी के शेयर बाजार में आसानी से बिकने योग्य नहीं हैं, तो उनकी कीमत तय करते समय तरलता की कमी को ध्यान में रखना उचित हो सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में अल्पसंख्यक निवेशकों द्वारा किसी प्रकार के उत्पीड़न या दमन (oppression) का ठोस आरोप साबित नहीं हुआ।

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अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • शेयर कैपिटल घटाने का प्रस्ताव वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार पारित हुआ।
  • मूल्यांकन पद्धति को पूरी तरह अनुचित या मनमाना नहीं कहा जा सकता।
  • NCLT और NCLAT के निष्कर्षों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।

इन्हीं कारणों से अदालत ने निवेशकों की सभी अपीलें खारिज कर दीं और भर्ति टेलीकॉम द्वारा अपनाई गई पूंजी घटाने की योजना को बरकरार रखा।

Case Title: Pannalal Bhansali vs Bharti Telecom Limited & Others

Case No.: Civil Appeal No. 7655 of 2025 (with connected appeals)

Decision Date: 09 March 2026

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