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तीन महीने की मोहलत, फिर भी अधूरा पालन? सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं में राज्य को फिर दिया निर्देश

गुरुपद बेरा और अन्य। बनाम बिनोद कुमार एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के आंशिककालिक शिक्षकों की अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नई representation और सुनवाई का निर्देश दिया।

Vivek G.
तीन महीने की मोहलत, फिर भी अधूरा पालन? सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं में राज्य को फिर दिया निर्देश

नई दिल्ली की अदालत संख्या में मंगलवार को माहौल गंभीर था। मामला सिर्फ बकाया वेतन का नहीं, बल्कि Supreme Court of India के आदेशों के पालन से जुड़ा था। पश्चिम बंगाल के आंशिककालिक शिक्षकों द्वारा दायर चार अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ किया कि पूर्व आदेशों के अनुपालन में प्रक्रिया की गंभीर खामियां रही हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद कलकत्ता हाईकोर्ट के 3 सितंबर 2020 के फैसले से शुरू हुआ था। उस फैसले में गैर-सरकारी सहायता प्राप्त उच्च माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत आंशिककालिक शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के बराबर बेसिक पे देने का निर्देश दिया गया था।

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बाद में राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां 2021 में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगी रही।

16 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि चूंकि मामला लंबे समय से लंबित रहा, इसलिए राज्य सरकार तीन महीने के भीतर हाईकोर्ट के आदेश का पालन करे और समान स्थिति वाले सभी शिक्षकों को इसका लाभ दे।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्हें पूरा लाभ नहीं मिला।
उनका कहना था कि-

  • 28 जुलाई 2010 से 24 दिसंबर 2013 तक की पूरी राशि का भुगतान नहीं हुआ
  • 2007 से 2009 और 2013 के बाद की अवधि के लिए दी गई representation पर सुनवाई नहीं हुई
  • स्कूलों से आवश्यक रिकॉर्ड भी नहीं मंगवाए गए

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि यह “सीधे तौर पर अदालत के आदेशों की अवहेलना” है।

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राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जानबूझकर किसी आदेश का उल्लंघन नहीं किया गया है। उनका दावा था कि जिन शिक्षकों को भुगतान का अधिकार बनता था, उन्हें राशि दे दी गई है और आवश्यक प्रक्रिया का पालन हुआ है।

अदालत की अहम टिप्पणी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने रिकॉर्ड का बारीकी से अवलोकन किया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वरिष्ठ वकील ने यह स्वीकार किया कि-

“हाईकोर्ट और इस न्यायालय के निर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और स्कूलों के रिकॉर्ड भी तलब नहीं किए गए।”

यह स्वीकारोक्ति सुनवाई का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अदालत ने यह मानते हुए कि प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है, अवमानना कार्यवाही को दंडात्मक दिशा में ले जाने के बजाय सुधारात्मक रास्ता अपनाया।

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अदालत ने निर्देश दिया कि-

  • याचिकाकर्ता छह सप्ताह के भीतर शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष नई representation दाखिल कर सकते हैं
  • सचिव याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत या वकील के माध्यम से सुनवाई का पूरा अवसर देंगे
  • संबंधित स्कूलों से सभी आवश्यक रिकॉर्ड पहले ही मंगवाए जाएंगे
  • सुनवाई के बाद चार महीने के भीतर एक विस्तृत और कारणयुक्त आदेश पारित किया जाएगा

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई प्रतिकूल आदेश आता है, तो याचिकाकर्ताओं के लिए कानून के तहत उपलब्ध उपाय खुले रहेंगे। इन्हीं निर्देशों के साथ सभी अवमानना याचिकाओं का निस्तारण कर दिया गया।

Case Title: Gurupada Bera & Ors. vs Binod Kumar & Ors.

Case No.: Contempt Petition (Civil) Diary No. 18826 of 2025 & connected matters

Case Type: Civil Contempt

Decision Date: 06 January 2026

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