राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि जांच के नाम पर किसी व्यक्ति के पूरे बैंक खाते को बिना स्पष्ट कारण और सीमा तय किए फ्रीज करना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी खाते से जुड़ी केवल एक निश्चित राशि विवादित है, तो पूरे खाते को बंद कर देना उचित नहीं है।
जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए भीलवाड़ा निवासी एक युवक के बैंक खाते को आंशिक रूप से संचालित करने की अनुमति दे दी।
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मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका भीलवाड़ा के निवासी विनीत कुमार अदीवाल द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उनका बैंक खाता, जिसे कथित रूप से संदिग्ध लेनदेन के आरोप में फ्रीज कर दिया गया था, उसे फिर से चालू कराया जाए।
रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता का UCO बैंक, नागोरी गार्डन ब्रांच, भीलवाड़ा में खाता नंबर 8140110087190 फ्रीज कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि पूरे खाते को फ्रीज किए जाने के कारण वह अपने रोज़मर्रा के वित्तीय काम भी नहीं कर पा रहा है।
अदालत की टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति फरजंद अली ने कहा कि जांच एजेंसियों को कानून के तहत बैंक खाते फ्रीज करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है।
अदालत ने कहा कि खाते को अनिश्चित समय के लिए फ्रीज रखना और खाता धारक को कारण या सीमा के बारे में जानकारी न देना गंभीर समस्या पैदा करता है।
पीठ ने कहा: “जांच लंबित रहने के दौरान बैंक खाते को फ्रीज किया जा सकता है, लेकिन इसे अनिश्चित काल तक जारी नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इससे व्यक्ति के दैनिक आर्थिक जीवन पर गंभीर असर पड़ता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि बिना ठोस कारण और बिना यह दिखाए कि खाते का कथित अपराध से प्रत्यक्ष संबंध है, खाते को फ्रीज करना संविधान के तहत दिए गए अधिकारों में दखल माना जा सकता है।
पीठ के अनुसार: “किसी नागरिक के बैंक खाते को बिना पर्याप्त कारण के फ्रीज करना उसकी आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 तथा अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत मिलने वाले अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।”
पूरे खाते को फ्रीज करना उचित नहीं
अदालत ने पाया कि इस मामले में केवल एक निश्चित राशि विवादित थी, लेकिन बैंक ने पूरे खाते को ही फ्रीज कर दिया था।
पीठ ने कहा कि इस तरह का “ब्लैंकेट ऑर्डर” यानी पूरे खाते को बंद कर देना उचित नहीं है। अदालत के अनुसार, यदि केवल कुछ राशि जांच के दायरे में है तो उसी राशि को होल्ड पर रखा जाना चाहिए।
न्यायालय ने कहा: “जांच के नाम पर पूरे खाते को फ्रीज कर देना और विवादित राशि या अवधि तय न करना मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के समान है।”
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अदालत का निर्णय
मामले पर विचार करने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि खाते में मौजूद विवादित राशि को ही फ्रीज रखा जाए, जबकि बाकी राशि के लिए खाता धारक को सामान्य बैंकिंग लेनदेन की अनुमति दी जाए।
अदालत ने संबंधित बैंक को निर्देश दिया कि खाते में केवल उतनी राशि तक डेबिट संचालन रोका जाए जो विवादित है, जबकि बाकी लेनदेन के लिए खाता पूरी तरह चालू रहेगा।
साथ ही, अदालत ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे इस आदेश की सूचना तुरंत संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक को दें और खाते को बिना किसी देरी के अनफ्रीज करवाएं।
इसके साथ ही याचिका और लंबित आवेदनों का निस्तारण कर दिया गया।
Case Title: Vinit Kumar Adiwal v. State of Rajasthan & Others
Case No.: S.B. Criminal Writ Petition No. 619/2026
Decision Date: 24 February 2026

